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Wednesday 20 June 2012

रोटी नहीं हलवा-पूड़ी

एक भिखारी ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक दी। 
एक 37-38 साल की महिला ने दरवाज़ा खोला।
 भिखारी: "एक रोटी दे दो।" 
महिला: "शर्म नहीं आती, इतने हट्ठे-कट्ठे हो, कुछ काम-धाम क्यों नहीं करते?" 
भिखारी: "मैडम, आप भी तो इतनी सुन्दर गोरी-चिट्टी हैं, गजब का फ़िगर है, उम्र भी ज्यादा नहीं है। आप मुंबई जाकर हीरोइन क्यों नहीं बन जातीं?" 
महिला: "ज़रा ठहरो, मैं अभी तुम्हारे लिए हलवा-पूड़ी बना के लाती हूँ।"

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